मिस्र में तानाशाह शासक हुस्नी मुबारक का इस्तीफा। यह एक एहसास की सुबह लाने वाली घटना है। इस बात की आस कि अवाम की आवाज़ को संगीनों के बल पर खामोश नहीं किया जा सकता। इस घटना ने यह बात साबित कर दिया है कि अवाम की आवाज़ में सचमुच बहुत ताक़त होती है। इस बात को दुनिया के तमाम हुक्मरानों को समझ लेना चाहिए। मिस्र के तहरीर चौक पर १८ दिनों तक चली जनक्रांति ने पूरी दुनिया में एक नूतन सन्देश दे दिया है। इस मुल्क में परिवर्तन के बाद यहाँ के लोगों की तकलीफें कम होती है या नहीं, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा पर हाँ मिस्र ने दुनिया के तमाम पीड़ित लोगों को अपने सपने को जिन्दा बचाए रखने की शक्ति तो दे ही दी है।
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