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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

क्‍या आप जरनैलिज्‍म से सहमत हैं

दोस्‍तों दो सप्‍ताह बाद लौटा हूं। एक नये ख्‍यालात के साथ! आपने गौर तो किया ही होगा जितने ही जूता प्रकरण हुए उनमें ज मुख्‍य रुप से उपस्थित रहा है। जैदी-जार्ज, जरनैल और अब जिंदल। खैर मैं यहां आपका तव्‍वजों दूसरी बात की तरफ चाहता हूं। मेरे मन में एक विचार आया है। शायद आप भी सहमत होंगे। क्‍या विरोध जताने के लिए जूत्‍ते मारने के तरीके को कोई नया नाम नहीं दिया जाना चाहिए। वह भी तब जबकि यह तरीका खूब तेजी से लोगों को रास आ रहा है, पसंद आ रहा है।

मेरा मानना है कि जूत्‍ते मारकर या फेंककर विरोध जताने की प्रक्रिया को हमें जरनैलिज्‍म नाम दे देना चाहिए। ऐसा इसलिए कि इस नाम में देशीपन है। मिट़टी की सोंधी खूशबू है। भले ही इस तरह विरोध करने का तरीका विदेश से लोकप्रिय हुआ हो पर भारत में यह तेजी से चलन में आ गया है। क्‍या आप इस बात से सहमत हैं। या कुछ और सोच रहे हैं-

खैर, इस बात पर भी आम राय बनानी जरुरी है कि क्‍या विरोध का यह तरीका सही है।