मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

पानी उदास है

नानी के बिना कहानी उदास है
रोजगार के बिना जवानी उदास है
टूट गये सपने, उम्मीदें उदास है
मेरे देश की आंख का पानी उदास है

गंगा में चाहे डूबकी लगाओ
महाकुंभ में जाकर जितना नहाओ
रो रही धरती, सुबकता आकाश है
मेरे देश की आंख का पानी उदास है

छिज गया भरोसा हमारा-तुम्हारा
परहित की बातें नहीं हैं गंवारा
पॉलिटिक्स हुई डर्टी, न कोई आश है
मेरे देश की आंख का पानी उदास है

सुखे जलाशय, सुख रही नदियां
पैसों की भूखी है ये देश-दुनिया
क्रिकेट में हो रहा पानी का नाश है
मेरे देश की आंख का पानी उदास है.

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 28-04-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2326 में दिया जाएगा
    धन्यवाद 

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