शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

मिस्र में आज़ादी की सुबह

मिस्र में तानाशाह शासक हुस्नी मुबारक का इस्तीफा। यह एक एहसास की सुबह लाने वाली घटना है। इस बात की आस कि अवाम की आवाज़ को संगीनों के बल पर खामोश नहीं किया जा सकता। इस घटना ने यह बात साबित कर दिया है कि अवाम की आवाज़ में सचमुच बहुत ताक़त होती है। इस बात को दुनिया के तमाम हुक्मरानों को समझ लेना चाहिए। मिस्र के तहरीर चौक पर १८ दिनों तक चली जनक्रांति ने पूरी दुनिया में एक नूतन सन्देश दे दिया है। इस मुल्क में परिवर्तन के बाद यहाँ के लोगों की तकलीफें कम होती है या नहीं, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा पर हाँ मिस्र ने दुनिया के तमाम पीड़ित लोगों को अपने सपने को जिन्दा बचाए रखने की शक्ति तो दे ही दी है।
इस सन्दर्भ में क्या आप कुछ और सोचते हैं?

5 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा है मानवाधिकार

    अंजाम देखा आपने
    हुस्ने मुबारक का

    था मिस्र का भी वही
    जो है हाल भारत का

    परजीवियों के राज
    का तख्ता पलट कर दो

    जन में नई क्रांति का
    जोश अब भर दो

    उठो आओ हिम्मत करो
    क्रांति का परचम धरो

    मत भूलो यह सरोकार
    अच्छा है मानवाधिकार

    राजेश सिंह

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  2. Bhatiya jee aur Rajesh jee thanks.
    Rajesh bhai kamal ki panktiyan likhi hai aapne.

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  3. akhilesh ji mere blog ko visit karne ke liye dhanywaad, ummeed karta hu ki aap nirantar mere wicharon par apna mat abhiwyakt karte rahenge..!

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