शनिवार, 16 मई 2009

जूते के शिकार सभी प्रत्‍याशी विजयी

यह महज इत्‍तेफाक नहीं तो क्‍या है कि इस चुनाव में जिस प्रत्‍याशी के उपर भी जूते फेंके गए वह जीत गया। गृहमंत्री पी चिदंबरम, लालकृष्‍ण आडवाणी और नवीन जिंदल ये सभी चुनाव जीत गए। इन सभी पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान या चुनाव प्रचार के दौरान जूते फेंके गए थे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर भी जूते उछाले गए थे पर वे इस बार चुनाव लडे ही नहीं, हां उनके नेतृत्‍व में कांग्रेस ने पूरे देश में शानदार सफलता हासिल की। कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री बीएस येदिरप्‍पा पर भी जूते फेंके गए थे। येदिरप्‍पा भी अपने पुत्र बी वाई राघवेंद्र को चुनाव जिताने में सफल रहे हैं।

जूता फेंकने की शुरुआत पत्रकार जरनैल सिंह ने की। जरनैल ने आठ अप्रैल को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान गृहमंत्री पी चिदंबरम पर जूता उछाला था।

है न यह कमाल का संयोग। मगर यह जानकर कहीं हारने वाले प्रत्‍याशी यह न सोचने लगें कि काश मुझपर भी कोई...

... हा...हा...हा।

11 टिप्‍पणियां:

  1. काश मुझपर भी कोई.....जूता फेक देता.

    अब सही है :)

    वीनस केसरी

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  2. हा..हा..हा...हा..हा..हा...हा..हा..हा...हा..हा..हा...हा..हा..हा...हा..हा..हा...

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  3. ... जूते तो जूते हैं, जीत अपनी जगह है!!!!

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  4. असली जूता जिन पर पड़ा है, उन का क्या?

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  5. हर क्रिया की एक विपरीत प्रतिक्रिया तो होती ही है .. बधाई सबों को।

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  6. जूते के शिकार सभी प्रत्‍याशी विजयी ....बहुत खूब....!!
    यह तो कमाल का संयोग है ... शायद अब जूतों का प्रचलन और बढ़ जाये .....!!


    [हाँ ...आपका कमेन्ट...." कविता कुछ अधूरी सी लगी..." सही है ...दुविधाओं के बीच लिखी नज़्म मुकम्मल कैसे हो सकती है.....]

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  7. जूता फेंकने की शुरूआत जरनैल सिंह ने की, और जूता खाकर जीतने वालों में शुरूआत नवीन जिंदल ने की. अगर ये आकलन नेताओं तक पहुंच गया तो अगली बार जूतों की नेता ही बौछार करवाएंगे.

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  8. जूते का मन्दिर न बनने लगे! भारत में जो चले उसकी पूजा होने लगती है।

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