गुरुवार, 26 मार्च 2009

भोजपुरी गजल

एक
जिंदगी सहकल रहे
मन तनी बहकल रहे

तन-बदन के के कहो
सांस ले दहकल रहे

मन के वन में आग-जस
जाने का लहकल रहे

चांद के आगोश में
चांदनी टहकल रहे

रात रानी रात-भर
प्‍यार से महकल रहे

दो
छन में कुछ अउर कुछ भइल छन में
मन में कुछ अउर कुछ भइल तन में

फूल सेमर के दिगमिगाइल बा
आग लागल बा जइसे मधुबन में

अइसे चमके लिलार के टिकुली
हो मनी जइसे नाग का फन में

बात खुल के भले भइल बाकिर
कुछ-ना-कुछ बात रह गइल मन में

(उपर वाला दुनो गजल पांडेय कपिल जी के बाटे। पांडेय कपिल जी भोजपुरी के वरिष्‍ठ आ प्रतिष्ठित रचनाधर्मी हईं।)

2 टिप्‍पणियां:

  1. पांडेय कपिल जी भोजपुरी के वरिष्‍ठ और प्रतिष्ठित रचनाधर्मी हैं और इसमें उनकी वरिष्ठता/रचनाधर्मिता दोनो झलकते हैँ। सरलता भी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. भोजपुरी की रचनाएं दिल में मिठास घोल देती हैं।

    उत्तर देंहटाएं